Electoral Bonds: जानें क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड, क्यों सुप्रीम कोर्ट ने मांगी जानकारी

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Electoral Bonds :

वैसे तो मोदी सरकार ने दावा किया है कि उन्होंने बैंकिंग प्रणाली को साफ-सुथरा बनाने का काम किया है, लेकिन इलेक्टोरल बॉन्ड ने उनपे सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी, 2024 को Electoral Bonds जारी करने पर रोक लगा दी थी। एसबीआई बैंक (SBI Bank) ने 22,217 Electoral Bond जारी किए हैं, सुप्रीम कोर्ट ने सभी Electoral Bonds के बारे में एसबीआई से जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने बांड जारीकर्ता की पूरी जानकारी मांगी है। एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से विवरण देने के लिए 30 जून, 2024 तक का समय मांगा है। एसबीआई बैंक द्वारा विवरण साझा करने के लिए एसबीआई बैंक के प्रति वफादारी पर सवाल खड़ा किया गया है।

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क्या है मामला?

आरबीआई के मानदंड के हिसाब से केवल आरबीआई ही बांड जारी करने के लिए तैयार है लेकिन मोदी सरकार ने संविधान में संशोधन करके एसबीआई को Electoral Bond जारी करने के लिए आरबीआई से अनुमति ले ली।
Electoral Bond राजनीतिक दलों को दान देने के लिए काम में लिया जाता है। इलेक्टोरल बॉन्ड में Donor की डिटेल गुप्त रखी जाती है, जिसे देश में मुद्दा नहीं बनाया जा सकता, यह भी होता है कि डोनर को सरकार ने सहयोग नहीं दिया।

लेकिन जब इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bonds )का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में आया तो सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को जल्दी से जल्दी Electoral बॉन्ड की जानकारी, चुनाव आयोग को देने के लिए कहा। एसबीआई बैंक ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि उन्हें और समय लगेगा दस्तावेज़ चुनाव आयोग के साथ साझा करें। एसबीआई बैंक को लगभाग 44000 इलेक्टोरल बांड की जानकारी देनी है। किस डोनर ने किस पार्टी को कितने चुनावी बांड दिये हैं। ये सारी जानकारी एसबीआई बैंक को चुनाव आयोग के साथ शेयर करनी है।

कांग्रेस का क्या कहना है?

कांग्रेस का मानना है कि एसबीआई बैंक डोनर की जानकारी छुपाने की कोशिश कर रही है। – Supriya Shrinate
Congress नेता सुप्रिया श्रीनेत का कहना है कि भारत देश का सबसे बड़ा बैंक है जिसकी 23000 शाखाएं, 66000 एटीएम और 48 करोड़ बैंक खाते हैं और एसबीआई बैंक पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत है और चाहे तो एक क्लिक के साथ सारी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दे सकती है। लेकिन बीजेपी (BJP) के भय से एसबीआई बैंक जानकारी देने में देरी कर रही है।

2017 से 2023 तक लगभग 12000 करोड़ रुपये राजनीतिक पार्टियों के द्वार कलेक्ट किए गए हैं जिसमें 6500 रुपये करोड़ सीधे बीजेपी के पास हो गए हैं। Electoral Bond 

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